प्रो. मैनेजर पाण्डेय और मीडिया ट्रायल :

Posted by arun dev on जून 15, 2017










डिजिटल मीडिया किस तरह से एकतरफा और जजमेंटल बना दिया जाता है इसके कई हिंसक उदहारण हमारे समाने हैं. कुछ साल पहले इसी फेसबुक पर खुर्शीद अनवर की घेर कर (आत्म)हत्या  कर दी गयी थी. वह आदमी वैश्विक धार्मिक कट्टरता से लड़ रहा था.

अभी कुछ दिन पहले ही मार्क्सवादी चिंतक और आलोचक प्रो. मैनेजर पाण्डेय की एक तस्वीर और कथित साक्षात्कार के आधार पर, उनके व्यक्तिगत जीवन पर जिस तरह से हिंसक हमले हुए हैं वे अमानवीय और आपराधिक से कम नहीं है.

शुक्र है कि प्रो. मैनेजर पाण्डेय फेसबुक, ट्विटर आदि पर  नहीं हैं नहीं तो संभावित का आप अनुमान लगा सकते हैं.


डिजिटल मीडिया पर जो लोग भी सक्रिय हैं उनसे एक न्यूनतम ज़िम्मेदारी और भाषाई मर्यादा की उम्मीद की  जाती हैं. अगर इस कथित आज़ाद स्पेस का  इसी तरह दुरूपयोग होता रहा है तो संभव है यह आज़ादी भी हम से छीन ली जाए. 

प्रो. मैनेजर पाण्डेय की सुपुत्री रेखा पाण्डेय ने  इस प्रकरण पर यह नोटिश जारी किया है.

प्रो. मैनेजर पाण्डेय और मीडिया ट्रायल                                




दिनांक 27/05/2017 से 05/06/2017 की अपने गाँव की यात्रा के दौरान माँ द्वारा आयोजित भागवत कथा के प्रारंभ के  दिन आयोजन शुरू करवाने के अनुरोध को स्‍वीकार कर बिना किसी तैयारी के पिता जी (मैनेजर पाण्डेय) माँ के साथ बैठ गए. वे अपनी प्रगतिशील सोच के कारण चाहे घर हो या बाहर सदैव धार्मिक अनुष्‍ठानों का विरोध करते रहे हैं, पर माँ आस्तिक हैं. उनकी उम्र इस समय लगभग 74 वर्ष है. गाँव का समाज शहर के समाज से एक अलग सोच रखता है. यह आयोजन शुद्ध रूप से व्यक्तिगत न होकर गाँव-समाज के अनुसार गँवई-समाज का भी था. गाँव के लोगों के सामने माँ के आग्रह को इस तरह अस्वीकार कर देना, उनका अपमान करना भी था. माँ के सम्‍मान को ठेस न पहुँचे इसलिए पिता जी (मैनेजर पाण्डेय) ने माँ का सहयोग किया.

मेरे गाँव का होने के कारण अनुप पाण्‍डेय ने इस घटनाक्रम का गलत फायदा उठाया. वहाँ खड़ी एक किशोरावस्‍था की लड़की को अपना मोबाइल देकर कहा कि जब दादाजी और दादीजी एक साथ बैठें तो एक फोटो खींच लेना और मुझे मोबाईल वापस दे देना. उस बालिका ने वैसा ही किया. ऐसा नहीं है कि अनुप पाण्डेय, पिता जी (मैनेजर पाण्डेय) की सोच, उनके चिन्तन, साहित्यिक उपल्बधियाँ, उम्र या बीमारियों से परिचित नहीं हैं. अनुप को पता है कि वे 76 वर्ष के हैं क्योंकि पिछले वर्ष गाजियाबाद के एक कॉलेज में भी पिता जी का 75वाँ जन्मदिन मनाया गया था और उस आयोजन में अनुप पाण्डेय भी शामिल थे. लेकिन अनुप का दो दिनों के लिए इस उद्देश्य से गाँव आना, फोटो खींचवाकर लाना और फेसबुक पर अपने अनुसार एक कल्पित इंटरव्यू के साथ पोस्ट करना आदि, यह साबित करता है कि यह सब करके वह सिर्फ पिता जी (मैनेजर पाण्डेय) की प्रतिष्ठा और छवि को धूल-धूसरित करना चाहते थे.


फेसबुक के उस पोस्ट को देखकर लोगों की जो प्रतिक्रिया होनी चाहिए वह हुई और साथ ही जिन्हें कुछ भी कह देने के अवसर की तलाश थी उन्हें वह भी मिला. लगभग 40 वर्षों की निरन्‍तर साधना, प्रगतिशील सोच पर 40 मिनट में अपमानजनक टिप्‍पणियों का अंबार सा लग गया और अब भी चल रहा है. गाँव से लौटने के बाद दिनांक 6/6/2017 की सुबह से इस संबंध में आनेवाले अनेकों फोन कॉल्स ने उन्हें अात्मिक और मानसिक रूप से काफी परेशान किया, जिसकी वजह से अस्वस्थ हो गए हैं और चिकित्‍सकों की देखरेख में हैं. 

अनुप सरासर झूठ बोल रहे हैं कि पिता जी (मैनेजर पाण्डेय) से उसकी कोई बातचीत हुई है. अनुप पाण्डेय को फेसबुक पर अपने झूठे बयान और कल्‍प‍ित इंटरव्‍यू का स्पष्टीकरण देते हुए उसे वापस लेना चाहिए. इस झूठ और षडयंत्र के लिए उन्‍हें फेसबुक पर ही माफी मांगनी चाहिए. यदि अनुप ऐसा नहीं करते है तो मैं उन पर अवमानना का मुकदमा तथा आपराधिक और दीवानी कानून के अंतर्गत मुक़दमा दायर करने के लिए बाध्‍य होऊँगी. उनका यह आपराधिक कृत्‍य अपमानजनक, झूठा और कोल-कल्‍प‍ित है. इससे हम सभी काफी आहत हैं.

रेखा पाण्डेय
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Rekha  pandey
Assistant Professor (Hindi) 
Head Office
Rashtriya Sanskrit Sansthan (Deemed Central University), 
56-57, Institutional Area, Janakpuri
New Delhi, India-110058